श्री राम राम रामेति, रमे रामे मनोरमे, सहस्रनाम तत्तुल्यं राम नाम वरानने..
तात स्वर्ग अपवर्ग सुख धरीअ तुला एक अंग, तूल न ताहि सकल मिलि, जो सुख लव सत्संग...
मेरी भाव बाधा हरौ, राधा नगरी सोई;
जा तन की झी परत, श्याम हरित दुति होई|
तीरथ नाए एक फल, संत मिले फल चार;
सतगुरु मिले अनत फल, कहत कबीर विचार||
पासा पकड़ा प्रेम का, सारी किया सरीर;
सतगुरु दांव सिखाईयां, खेलत दास कबीर||
हरि सम जग कछु वस्तु नहीं, प्रेम पंथ सम पंथ;
सतगुरु सम सज्जन नहीं, गीता सम नहीं ग्रन्थ||
अस्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमान्सच विभीषण: कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरजीवीनः
अस्वत्थामा , बली , व्यास , हनुमान , विभीषण , कृपाचार्य व परशुराम ये सात चिरजीवी हैं
Inake alava Rishi Markandeya bhi Amar hain.
गुरु बिन ज्ञान न उपजे, गुरु बिन मिटे न भेद;
गुरु बिन संशय न मिटे, जय जय जय गुरु देव|
दुर्लभो मनुषो देहो, देहिनां छड भन्गुरः
तत्रापि दुर्लभं मन्ये, वैकुंठ प्रिय दर्शनम्||
Shivashtakam!
http://www.youtube.com/watch?v=tPw3A1k6N58&feature=related
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