Tuesday, March 13, 2012

आर्य और द्रविड़ दोनों गुण वाचक शब्द है ,जाति वाचक नहीं

--------------------------------इतिहास -(५}----------------------------------------
आर्य और द्रविड़ दोनों गुण वाचक शब्द है ,जाति वाचक नहीं । परन्तु ब्रिटिश इतिहासकारों ने इनका जातिवाचक प्रयोग कर देश में विखराव पैदा कर दिया।यह वैसा ही शरारती कारनामा था जैसा राम जन्मभूमि आन्दोलन केसमय अर्जुन सिंह ने किया था ।सहमत (सफ़दर हाशमी मेमोरिअल ट्रस्ट )द्वारा अयोध्या में एक पोस्टर में -राम ने जनक (फादर )सुता (डाटर)से विवाह किया का अनुवाद अर्जुन सिंह के चहेतों ने किया राम मेरीड हिज फादर्स डाटर ।अंग्रेजो और काले अंग्रेजो में कैसी समानता है ।
आर्य का अर्थ है सुसभ्य ,सुसंस्कृत ।सभी वैदिक विद्वान् यही अर्थ करते है ।
प्रियं माँ क्रनु देवेसु प्रियं राजसु माँ कृधि
प्रियं सर्वत्र पश्यत इत शूद्रे उत आर्ये द्रविड़ अर्थ होता है धन संपत्ति हम भगवान को द्रविड़ कहते है -त्वमेव विद्या द्रविड़म त्वमेव ।
उत्तर के लोग दक्षिण वालो को द्रविड़इसलिए कहते थे क्यों कि दक्षिण वालो ने कभी लोहे के पानी का स्वाद नहीं चखा ।विदेशी आक्रान्ताओ ने विन्द्याचल के नीचे लूटमार नहीं की। सोने की एक मात्र खान दक्षिण भारत में ,हीरो की खाने दक्षिण में ,मसाले दक्षिण में ,बार बार आक्रमण न होने से राजनीतिक स्थिरता एवं शांति के कारण निर्वाध व्यापार ।इस कारण दक्षिण भारतीय द्रविड़ कहलाते थे ।वे धनाड्य थे जाति नहीं ।क्रमशः ----

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