Tuesday, February 28, 2012

FB post about Kasauti to accept/reject any thing

*****बुद्ध;- " हे कलामों , किसी बात को केवल इसलिए मत मानो की वह तूम्हारे सुनने में आई है , किसी बात को केवल ईसलिए मत मानो कि वह परंपरा से चली आई है -आप दादा के जमाने से चली आई है , किस...ि बात को केवल इसलिए मत मानो की वह धर्म ग्रंथो में लिखी हुई है , किसी बात को केवल इसलिए मत मानो की वह न्याय शास्त्र के अनुसार है किसी बात को केवल इसलिए मत मानो की उपरी तौर पर वह मान्य प्रतीत होती है , किसि बात को केवल इसलिए मत मानो कि वह हमारे विश्वास या हमारी दृष्टी के अनुकूल लागती है ,किसि बात को इसलिए मत मनो की उपरी तौर पर सच्ची प्रतीत होती है किसी बात को इसलिए मत मानो की वह किसी आदरणीय आचार्य द्वारा कही गई है . कालामों ;- फिर हमें क्या करना चाहिए .......????

बुद्ध ;- .....कलामो , कसौटी यही है की स्वयं अपने से प्रश्न करो कि क्या ये बात को स्वीकार करना हितकर है .....???? क्या यह बात करना निंदनीय है ...??? क्या यह बात बुद्धिमानों द्वारा निषिद्ध है , क्या इस बात से कष्ट अथवा दुःख ; होता है कलमों, इतना ही नही तूम्हे यह भी देखना चाहिए कि क्या यह मत तृष्णा, घृणा ,मूढता ,और द्वेष की भावना की वृद्धि में सहायक तो नही है , कालामों, यह भी देखना चाहिए कि कोई मत -विशेष किसी को उनकी अपनी इन्द्रियों का गुलाम तो नही बनाता, उसे हिंसा में प्रवृत्त तो नही करता , उसे चोरी करने को प्रेरित तो नही करता , अंत में तुम्हे यह देखना चाहिए कि यह दुःख ; के लिए या अहित के लिए तो नही है , इन सब बातो को अपनी बुद्धि से जांचो, परखो और तूम्हे स्वीकार करने लायक लगे , तो ही इसे अपनाओ ..........!!!!!

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