Wednesday, February 29, 2012

Geeta par Bhashyon ki soochi

गीता पर भाष्य

संस्कृत साहित्य की परम्परा में उन ग्रन्थों को भाष्य (शाब्दिक अर्थ - व्याख्या के योग्य), कहते हैं जो दूसरे ग्रन्थों के अर्थ की वृहद व्याख्या या टीका प्रस्तुत करते हैं। भारतीय दार्शनिक परंपरा में किसी भी नये दर्शन को या किसी दर्शन के नये स्वरूप को जड़ जमाने के लिए जिन तीन ग्रन्थों पर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करना पड़ता था (अर्थात् भाष्य लिखकर) उनमें भगवद्गीता भी एक है (अन्य दो हैं- उपनिष...द् तथा ब्रह्मसूत्र)।
भगवद्गीता पर लिखे गये प्रमुख भाष्य निम्नानुसार हैं-
गीताभाष्य - आदि शंकराचार्य
ज्ञानेश्वरी - ज्ञानेश्वर महाराज ने संस्कृत से गीता का मराठी में अनुवाद किया ।
श्रीमद् भगवद् गीता यथारूप-प्रभुपाद
गीतारहस्य - बालगंगाधर तिलक
अनासक्ति योग - महात्मा गांधी
(Essays on Gita) - अरविन्द घोष
गीताई - विनोबा भावे
गीता तत्व विवेचनी - जयदयाल गोयन्दका
BhagvadGita As It Is-स्वामी प्रभुपाद (इस्कोन के संस्थापक)

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